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बृहस्पतिवार व्रत कथा PDF | Brihaspativar Vrat Katha, Vishnu Bhagwan Ki Katha, Brihaspativar Ki Aarti

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बृहस्पतिवार व्रत का महत्व (Significance of Brihaspativar Vrat)

हिन्दू धर्म में सप्ताह के प्रत्येक दिन किसी न किसी देवता की उपासना के लिए समर्पित होता है।
गुरुवार या बृहस्पतिवार का दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति देव (Guru Brihaspati) की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

इस दिन व्रत रखने से:

  • मनुष्य को ज्ञान, धन और सुख-शांति की प्राप्ति होती है,
  • पारिवारिक कलह दूर होता है,
  • और जीवन में भाग्य और प्रतिष्ठा का उदय होता है।

बृहस्पति देव को देवताओं के गुरु कहा गया है। वे देवगुरु हैं — जो हमें सही मार्ग दिखाते हैं।
उनकी कृपा से मनुष्य को धर्म, नीति और सत्य का बोध होता है।
इसीलिए, जो व्यक्ति हर गुरुवार को बृहस्पतिवार व्रत कथा (Brihaspativar Vrat Katha) पढ़ता और सुनता है, उसके जीवन से दुर्भाग्य दूर होता है और समृद्धि आती है।


🌿 व्रत विधि (Brihaspativar Vrat Vidhi)

बृहस्पतिवार व्रत आरंभ करने से पहले विधिवत नियमों का पालन करना आवश्यक है। नीचे सरल तरीके से इसका विधान बताया गया है:

  1. स्नान और संकल्प:
    सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करें और पीले वस्त्र धारण करें।
    भगवान विष्णु और बृहस्पति देव का स्मरण करें —
    “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।

  2. पूजन सामग्री:

  • पीले फूल
  • हल्दी, गुड़, चना दाल
  • पीले वस्त्र
  • केले के पत्ते
  • दीपक और धूपबत्ती
  • तुलसी पत्र
  1. पूजा विधि:
    भगवान विष्णु के चित्र या प्रतिमा के सामने दीपक जलाकर, जल अर्पण करें।
    फिर बृहस्पति देव का ध्यान करें और कथा सुनें।
    प्रसाद के रूप में चने की दाल, गुड़ और केले का फल अर्पण करें।

  2. भोजन नियम:
    इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए।
    व्रत करने वाले को केवल एक बार पीले भोजन (जैसे चना दाल, केसर युक्त खिचड़ी, केला आदि) लेना चाहिए।

  3. आरती:
    पूजा के अंत में “बृहस्पति देव आरती (Brihaspativar Ki Aarti)” करें।


📖 बृहस्पतिवार व्रत कथा (Brihaspativar Vrat Katha in Hindi)

एक समय की बात है — एक ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ बहुत गरीब अवस्था में जीवन व्यतीत कर रहा था।
वह भिक्षा मांगकर अपना जीवन यापन करता था।
एक दिन बृहस्पति देव, एक वृद्ध साधु के रूप में उसके घर आए और बोले —

“हे ब्राह्मण! यदि तुम मेरी आराधना करोगे, तो तुम्हारे सभी दुख मिट जाएंगे।
प्रत्येक गुरुवार को मेरा व्रत करो, कथा सुनो, और पीले रंग का दान करो।”

ब्राह्मण और उसकी पत्नी ने श्रद्धा से व्रत आरंभ किया।
उन्होंने हर बृहस्पतिवार विष्णु भगवान और बृहस्पति देव की पूजा की।
धीरे-धीरे उनके घर में धन, अन्न और सुख आने लगा।

उनकी यह उन्नति देखकर पड़ोसी की पत्नी जलने लगी।
उसने कहा — “मैं इन्हें फिर से गरीब बना दूंगी।”
उसने एक दिन ब्राह्मण की पत्नी को धोखा दिया —
“गुरुवार को घर में झाड़ू लगाना और पीली वस्तु धोना बहुत शुभ होता है।”

परंतु यह अशुभ कार्य था।
जैसे ही ब्राह्मणी ने ऐसा किया, उसके घर से सारी समृद्धि चली गई।
उनका जीवन फिर से दुःखमय हो गया।

तब ब्राह्मण की पत्नी ने पश्चाताप किया और पुनः बृहस्पति देव का व्रत करना शुरू किया।
बृहस्पति देव प्रसन्न हुए और फिर से उन्हें सुख-समृद्धि प्रदान की।

इस प्रकार जो भी व्यक्ति बृहस्पतिवार की कथा (Brihaspativar Vrat Katha) श्रद्धा से सुनता या पढ़ता है,
उसके घर में कभी दरिद्रता नहीं आती।


🕉️ बृहस्पति देव की आरती (Brihaspativar Ki Aarti)

जय जय श्री बृहस्पति देवा, सुन लीजे अरज हमारी।
कर दो कृपा आज दिनेश्वर, दूरी संकट भारी॥

गुरु देव दया सागर तुम, भक्तों के रखवारे।
जो जन सुमिरन करे तुम्हारा, जीवन सुख भरे॥

गुरु देव ज्ञान के दाता, संकट हरो हमारे।
भक्ति भाव से तेरा स्मरण, दूर करे दुख सारे॥

जय जय श्री बृहस्पति देवा, सुन लीजे अरज हमारी॥

इस आरती को हर व्रत के अंत में गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।


🌼 बृहस्पति देव कौन हैं? (Who is Brihaspati Dev?)

बृहस्पति देव देवताओं के गुरु (teacher of Gods) हैं।
वह देवगुरु बृहस्पति के नाम से प्रसिद्ध हैं और ज्ञान, बुद्धि और नीति के प्रतीक माने जाते हैं।

पुराणों के अनुसार, वे अंगिरा ऋषि के पुत्र हैं और उनका वाहन हाथी है।
उनका रंग पीला और स्वरूप तेजस्वी है।
उनके हाथों में कमंडल, पुस्तक और जपमाला होती है।

बृहस्पति ग्रह को भी ज्योतिष में अत्यंत शुभ ग्रह माना गया है।
यदि किसी की कुंडली में बृहस्पति मजबूत हो, तो उसे ज्ञान, पद, सम्मान और धन की प्राप्ति होती है।


🪷 बृहस्पतिवार व्रत कथा मराठी (Brihaspativar Vrat Katha Marathi)

मराठी भक्तोंसाठी, गुरुवारचा दिवस विष्णू आणि बृहस्पति देवांना अर्पण केला जातो।
या दिवशी उपवास केल्याने सर्व दुःखांचा नाश होतो आणि जीवनात समृद्धी येते।

कथा अशी आहे —
एक ब्राह्मण आणि त्याची पत्नी गरिबीत राहत होती।
एके दिवशी बृहस्पति देव साधू रूपात आले आणि म्हणाले —
“गुरुवारचा उपवास करा, कथा ऐका, आणि पिवळे दान करा।”

ते दोघे दर गुरुवारी व्रत करू लागले आणि त्यांच्या आयुष्यात सुख व धन वाढू लागले।
पण इतर लोकांच्या मत्सरामुळे त्यांनी एकदा नियम मोडला आणि पुन्हा दु:ख आले।
पुन्हा भक्तीने उपवास केल्यावर त्यांचे सर्व संकट नष्ट झाले।

म्हणून जो कोणी भक्त श्रद्धेने बृहस्पति देवाची पूजा करतो,
त्याचे सर्व पाप नष्ट होतात आणि आयुष्यात शांती प्राप्त होते।


📘 Vishnu Bhagwan Ki Vrat Katha (विष्णु भगवान की व्रत कथा)

भगवान विष्णु सृष्टि के पालनहार हैं।
बृहस्पतिवार को उनकी पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है क्योंकि विष्णु जी और बृहस्पति देव एक ही तत्त्व का प्रतीक हैं — ज्ञान और धर्म।

कथा के अनुसार, एक समय धरती पर अधर्म बढ़ गया।
तब बृहस्पति देव ने विष्णु भगवान से प्रार्थना की —
“हे प्रभु, मनुष्य मार्ग भूल चुका है, कृपा कर उसे सद्बुद्धि दें।”
भगवान विष्णु ने कहा —
“जो भी भक्त बृहस्पतिवार को मेरा और तुम्हारा व्रत करेगा,
उसे धर्म और समृद्धि दोनों का आशीर्वाद मिलेगा।”

इसलिए जो भी भक्त विष्णु जी की पूजा करते हैं,
उन्हें गुरुवार व्रत कथा (Guruvar Vrat Katha) अवश्य पढ़नी चाहिए।


🌺 बृहस्पतिवार व्रत के लाभ (Benefits of Brihaspativar Vrat)

  1. जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
  2. कर्ज और दरिद्रता दूर होती है।
  3. दांपत्य जीवन में प्रेम और स्थिरता बढ़ती है।
  4. शिक्षा, ज्ञान और करियर में उन्नति होती है।
  5. गुरु ग्रह के दोष दूर होते हैं।
  6. भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की कृपा से मनोकामना पूर्ण होती है।

📅 व्रत समाप्ति और दान (Conclusion & Daan)

बृहस्पतिवार व्रत को 16 गुरुवार तक लगातार करना शुभ होता है।
व्रत समाप्ति के दिन केले के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं,
ब्राह्मण या किसी विद्वान को पीले वस्त्र, हल्दी, गुड़ और दाल का दान करें।


📄 बृहस्पतिवार व्रत कथा PDF Download (Download Links)

🔹 👉 बृहस्पतिवार व्रत कथा PDF (Hindi)
🔹 👉 Brihaspativar Vrat Katha PDF in Marathi
🔹 👉 Guruvar Vrat Katha (Vishnu Bhagwan Katha PDF)
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